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पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन: NEET क्विक रिवीज़न

लेखक: राजेश साहू, बॉटनी फ़ैकल्टी, प्रमाण इंस्टिट्यूट (NEET पढ़ाने का 25 साल का अनुभव, पूर्व Allen, पूर्व Aakash)

प्रकाशित विश्लेषणों के अनुसार NEET 2025 में यह बायोलॉजी का सबसे बड़ा चैप्टर था, लगभग 10 सवालों के साथ। लगभग हर सवाल NCERT की किसी सीधी लाइन से आता है: कोई भित्ति की परत, कोई संख्या, कोई उदाहरण पौधा। यह पेज वे लाइनें इकट्ठा करता है जो बार-बार पूछी जाती हैं, ताकि आप पूरा चैप्टर 15 मिनट में दोहरा सकें।

नर पक्ष: पुंकेसर और परागकण

  1. एक सामान्य परागकोश द्विपालित और द्विकोष्ठी (dithecous) होता है, जिसमें चार लघुबीजाणुधानी होती हैं।
  2. लघुबीजाणुधानी की भित्ति में चार परतें होती हैं: बाह्यत्वचा, अंतःथीसियम, मध्य परतें और टेपीटम। टेपीटम सबसे भीतरी परत है और विकसित हो रहे परागकणों को पोषण देती है; इसकी कोशिकाओं में अक्सर एक से ज़्यादा केंद्रक होते हैं।
  3. लघुबीजाणुजनन: हर लघुबीजाणु मातृ कोशिका अर्धसूत्री विभाजन से लघुबीजाणुओं का चतुष्क बनाती है, जो परागकण बनते हैं।
  4. परागकण की भित्ति दो परतों की होती है। बाह्यचोल (एक्साइन) स्पोरोपोलेनिन से बनी होती है, जो सबसे प्रतिरोधी ज्ञात कार्बनिक पदार्थ है; कोई एंज़ाइम इसे नष्ट नहीं कर सकता। जनन छिद्र वे जगहें हैं जहाँ स्पोरोपोलेनिन नहीं होता। अंतःचोल (इंटाइन) सेल्युलोज़ और पेक्टिन से बनी होती है।
  5. परिपक्व परागकण में एक बड़ी कायिक कोशिका और एक छोटी जनन कोशिका होती है। 60% से ज़्यादा आवृतबीजियों में परागकण इसी 2-कोशिकीय अवस्था में झड़ते हैं; बाकी में जनन कोशिका पहले ही दो नर युग्मकों में बँट चुकी होती है (3-कोशिकीय अवस्था)।
  6. चावल और गेहूँ के परागकण लगभग 30 मिनट तक जीवित रहते हैं; कुछ कुलों (रोज़ेसी, लेग्यूमिनोसी, सोलेनेसी) में महीनों तक। परागकण को द्रव नाइट्रोजन में −196 °C पर सहेजा जा सकता है।

मादा पक्ष: बीजाण्ड और भ्रूणकोष

  1. गुरुबीजाणुजनन: गुरुबीजाणु मातृ कोशिका अर्धसूत्री विभाजन से चार गुरुबीजाणु बनाती है। आमतौर पर केवल एक जीवित रहता है (एकबीजाणुक विकास)।
  2. क्रियाशील गुरुबीजाणु का केंद्रक समसूत्री विभाजन से तीन बार बँटता है, जिससे 8-केंद्रकीय, 7-कोशिकीय भ्रूणकोष बनता है।
  3. बीजाण्डद्वारी सिरे पर अंड समुच्चय होता है: दो सहायक कोशिकाएँ (सिनर्जिड) और एक अंड कोशिका। सिनर्जिड में तंतुरूप समुच्चय (फ़िलिफ़ॉर्म उपकरण) होता है जो परागनलिका को दिशा देता है।
  4. निभागीय सिरे पर तीन प्रतिमुखी कोशिकाएँ (एंटीपोडल) होती हैं, और बड़ी केंद्रीय कोशिका में दो ध्रुवीय केंद्रक होते हैं।

परागण

प्रकारअर्थ
स्वयुग्मन (ऑटोगैमी)परागकण उसी फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचता है
समकुल्यपरागण (गीटोनोगैमी)परागकण उसी पौधे के दूसरे फूल पर पहुँचता है: काम में पर-परागण, पर आनुवंशिक रूप से स्वयुग्मन जैसा
परपरागण (ज़ेनोगैमी)परागकण दूसरे पौधे के फूल पर पहुँचता है: नए जीन लाने वाला एकमात्र प्रकार
अनुन्मीलयी (क्लिस्टोगैमस) फूलकभी नहीं खुलते, इसलिए परागणकर्ता के बिना भी बीज बनाते हैं (Viola, Oxalis, Commelina)
कारकमुख्य लक्षण और उदाहरण
वायुहल्के, गैर-चिपचिपे परागकण; खुले पुंकेसर; बड़ा पंखनुमा वर्तिकाग्र; अक्सर हर अंडाशय में एक बीजाण्ड; घासों में आम; मक्का का टैसल वर्तिकाग्र और वर्तिका है
जलVallisneria, Hydrilla, Zostera (समुद्री घास)। जलकुंभी और वॉटर लिली पानी में उगते हैं, पर इनका परागण कीटों या वायु से होता है
कीट और जंतुबड़े, रंगीन, सुगंधित, मकरंद से भरे फूल। युका और उसका मॉथ एक-दूसरे पर निर्भर हैं

स्व-परागण रोकने के उपाय: परागकण झड़ने और वर्तिकाग्र के ग्रहणशील होने का अलग समय, परागकोश और वर्तिकाग्र की अलग स्थिति, स्व-असंगतता, और एकलिंगी फूल। अरंडी और मक्का जैसे उभयलिंगाश्रयी (monoecious) पौधे स्वयुग्मन रोकते हैं पर समकुल्यपरागण नहीं; पपीते जैसे एकलिंगाश्रयी (dioecious) पौधे दोनों रोकते हैं।

कृत्रिम संकरण: विपुंसन (परागकण झड़ने से पहले परागकोश हटाना) और बैगिंग (अनचाहे परागकण से बचाने के लिए फूल को ढकना)।

निषेचन और उसके बाद

  1. द्विनिषेचन: एक नर युग्मक अंड से मिलता है (युग्मक संलयन), जिससे द्विगुणित युग्मनज बनता है। दूसरा दो ध्रुवीय केंद्रकों से मिलता है (त्रिसंलयन), जिससे त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनता है।
  2. भ्रूणपोष भ्रूण से पहले विकसित होता है। नारियल पानी मुक्त-केंद्रकीय भ्रूणपोष है, और सफ़ेद गरी कोशिकीय भ्रूणपोष।
  3. जिन बीजों में भ्रूणपोष बचा रहता है वे भ्रूणपोषी (एल्ब्यूमिनस) हैं (गेहूँ, मक्का, जौ, अरंडी); जिनमें यह ख़त्म हो जाता है वे अभ्रूणपोषी हैं (मटर, मूँगफली)। बचा हुआ बीजाण्डकाय (न्यूसेलस) पेरिस्पर्म कहलाता है (काली मिर्च, चुकंदर)।
  4. सबसे पुराना दर्ज जीवित बीज लुपिन (Lupinus arcticus) का है, लगभग 10,000 साल पुराना। लगभग 2,000 साल पुराना खजूर का बीज मृत सागर के पास राजा हेरोद के महल में मिला था।
  5. आभासी फल आंशिक रूप से पुष्पासन से बनते हैं (सेब, स्ट्रॉबेरी, काजू)। अनिषेकफली (पार्थेनोकार्पिक) फल बिना निषेचन के बनते हैं (केला)।
  6. असंगजनन (एपोमिक्सिस) बिना निषेचन के बीज बनना है (कुछ घासें और ऐस्टेरेसी)। बहुभ्रूणता, यानी एक बीज में एक से ज़्यादा भ्रूण, नीबू वंश (साइट्रस) और आम में आम है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

परागकोश की कौन-सी परत परागकणों को पोषण देती है? टेपीटम, भित्ति की सबसे भीतरी परत।

एक सामान्य भ्रूणकोष में कितनी कोशिकाएँ और केंद्रक होते हैं? 7 कोशिकाएँ और 8 केंद्रक।

समकुल्यपरागण आनुवंशिक रूप से स्वयुग्मन जैसा क्यों है? परागकण और वर्तिकाग्र दोनों एक ही पौधे के हैं, इसलिए कोई नया जीन नहीं जुड़ता।

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